रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट डिफेंस मिनिस्टर पीटर खलील के साथ शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध तीन प्रमुख स्तंभों पर टिके हैं। वो है- सरकारों के बीच सहयोग, जनता के बीच संबंध, और व्यावसायिक हितों का मेल।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल ही में एक बड़ा रक्षा करार हुआ है, जिसने दोनों देशों के रणनीतिक और औद्योगिक संबंधों को नई दिशा दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपनी दो दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा (9–10 अक्टूबर 2025) पर कैनबरा पहुँचे, जहाँ उनका स्वागत ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तीन बड़े रक्षा समझौते हुए जिनमें रक्षा उत्पादन, औद्योगिक सहयोग, और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग (वायुयान में हवा में इंधन भरने) से जुड़ी साझेदारी शामिल है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को अपने रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है ताकि दोनों देश मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ा सकें। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती समान मूल्यों, लोकतंत्र और परस्पर भरोसे पर आधारित है। यह सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। दोनों देशों की सेनाएँ पहले से ही कई साझा अभ्यासों में हिस्सा लेती रही हैं, और अब इस साझेदारी से समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी के नए रास्ते खुलेंगे। राजनाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन अब ₹1.51 लाख करोड़ के स्तर तक पहुँच गया है और आने वाले समय में भारत वैश्विक रक्षा उद्योग में एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यह करार दोनों देशों की गहरी होती दोस्ती और भरोसे का प्रतीक माना जा रहा है।
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सिडनी:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट डिफेंस मिनिस्टर पीटर खलील के साथ शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध अब एक नए मुकाम पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में स्थापित हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत हम अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सह-निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राजनाथ सिंह दो दिवसीय यात्रा पर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुआ कितना बड़ा रक्षा करारgoogl.com… राजनाथ सिंह ने बताया दोनों देशों की दोस्ती का राज
दोनों देशों के रिश्ते सामान मूल्यों पर आधारितः राजनाथ सिंह:
राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में काफी गहरे हुए हैं। नवंबर 2024 में भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन, अक्टूबर 2024 में हुई 2+2 वार्ता, जुलाई 2025 में ऑस्ट्रेलियाई उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री की भारत यात्रा, और अब उनकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह मजबूत संबंध समान मूल्यों और हितों पर आधारित हैं। दोनों देश कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं और लोकतंत्र, विविधता, स्वतंत्रता व सुशासन जैसी साझा परंपराओं पर खड़े हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों के तीन स्तंभ:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध तीन प्रमुख स्तंभों पर टिके होते हैं। वो है- सरकारों के बीच सहयोग, जनता के बीच संबंध, और व्यावसायिक हितों का मेल। उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। वैश्विक अस्थिरता और व्यापार बाधाओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार 6.5% से अधिक की दर से बढ़ रही है।
भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ का
भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुआ कितना बड़ा रक्षाhome करार… राजनाथ सिंह ने बताया दोनों देशों की दोस्ती का राज
रक्षा क्षेत्र की बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ (करीब 18 अरब डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 18% ज्यादा है और अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। उन्होंने बताया कि भारत के रक्षा निर्यात भी तेजी से बढ़े हैं। बीते साल भारत ने करीब ₹23,622 करोड़ (लगभग 2.76 अरब डॉलर) के रक्षा उपकरणों का निर्यात किया और अब भारतीय कंपनियां करीब 100 देशों को निर्यात कर रही हैं। भारतीय रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को भी काफी आसान बनाया है। अब 74% तक एफडीआई ऑटोमैटिक रूट के तहत और उससे ज्यादा निवेश सरकार की मंजूरी से किया जा सकता है, खासकर जब वह आधुनिक या अत्याधुनिक तकनीक लाता हो। भारत का रक्षा उत्पादन ढांचा लगातार उदारीकृत किया जा रहा है ताकि देश को और अधिक व्यापार अनुकूल बनाया जा सके।भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुआ कितना बड़ा रक्षा करार… राजनाथ सिंह ने बताया दोनों देशों की दोस्ती का राज
राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत बुलाया
तकनीकी सहयोग पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत का DRDO और ऑस्ट्रेलिया का डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप पहले से ही टोएड एरे सेंसर (towed array sensors) पर काम कर रहे हैं। इस साल के अंत तक दोनों देश क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और एडवांस साइंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। रक्षा मंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत के रक्षा उद्योग के साथ साझेदारी के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर अत्याधुनिक प्रणालियां जैसे प्रपल्शन टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स, फ्लाइट सिम्युलेटर और एडवांस मटीरियल्स विकसित और उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त उपक्रमों के जरिए दोनों देशों के रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप साझा प्लेटफॉर्म तैयार किए जा सकते हैं, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग नए आयाम छू रहेः खलील भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुआ कितना बड़ा रक्षा करार… राजनाथ सिंह ने बताया दोनों देशों की दोस्ती का राज
ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट डिफेंस मिनिस्टर पीटर खलील ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग तेजी से नए आयाम छू रहा है। उन्होंने कहा, ‘दिसंबर 2022 में लागू हुआ ऑस्ट्रेलिया-इंडिया इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (AI-ECTA) इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह समझौता भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक साझेदारी के लिए एक नई रूपरेखा तय करता है, जिसे इस साल की शुरुआत में लॉन्च किया गया था।’
ऑस्ट्रेलिया का पहला रक्षा उद्योग व्यापार मिशन
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खलील ने कहा कि इस समझौते के जरिए दोनों देशों की मानव संसाधन और आर्थिक संभावनाओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। मानव और आर्थिक रिश्ते हमारे सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभों में से दो हैं। तीसरा स्तंभ रक्षा है — और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग अब हमारी रणनीतिक साझेदारी के सबसे मजबूत आधारों में से एक बन चुका है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अब कई क्षेत्रों को कवर करता है, जिनमें समुद्री क्षेत्र की निगरानी (maritime domain awareness), सूचना साझा करना, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान, और सैन्य प्रशिक्षण शामिल हैं। खलील ने कहा कि कुछ महीने पहले ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक्सरसाइज टैलिस्मन सेबर (Talisman Sabre) में भारत की पहली भागीदारी इस बात का उदाहरण है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग कितना मजबूत हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग अब मानव, आर्थिक और रक्षा स्तंभों — इन तीनों को जोड़ते हुए काम कर रहा है। आज की बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें रक्षा उद्योग, नवाचार, अनुसंधान और व्यापार जगत के प्रमुख लोग एक साथ चर्चा के लिए मौजूद हैं। पीटर खलील ने यह भी बताया कि अभी ऑस्ट्रेलिया का पहला रक्षा उद्योग व्यापार मिशन भारत में चल रहा है, जो इस सहयोग को नई दिशा देगा।
कौन शामिल:
– भारत से: राजनाथ सिंह
– ऑस्ट्रेलिया से: उप प्रधानमंत्री兼 रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स, साथ ही अन्य रक्षा अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधि।
कब: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ऑस्ट्रेलिया की दो-दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं, 9-10 अक्टूबर 2025 को।
कहाँ: यात्रा का मुख्य केंद्र कैनबरा है, ऑस्ट्रेलिया की राजधानी।
करार की खास बातें — किन क्षेत्रों में समझौते हुए
- रक्षा उद्योग / उत्पादन
भारत-ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा उत्पादन और औद्योगिक साझेदारी (defence manufacturing / industrial cooperation) बढ़ाने पर जोर दिया है। भारत का रक्षा उत्पादन वर्तमान में लगभग ₹1.51 लाख करोड़ पर पहुँच चुका है, और इसे और बढ़ाने की संभावना जताई गई है। - सामरिक साझेदारी (Strategic / Operational Cooperation)
दोनों देशों ने सशस्त्र बलों के बीच परिचालन (operational) साझेदारी को मज़बूत करने, समुद्री सुरक्षा (maritime security), साइबर रक्षा एवं क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर मिलकर काम करने का मन बनाया है। - समय-समय पर नौसैनिक और वायुसेना सहयोग
– ऑस्ट्रेलिया के साथ “वेलकम टू कंट्री स्मोक सेरेमनी” जैसा सांस्कृतिक प्रेम संकेतों से स्वागत किया गया।
– दोनों देशों की वायु सेनाओं की एयर टू एयर रिफ्यूलिंग (विमान में हवा में इंधन भरने) जैसी क्षमताओं पर चर्चा हुई/समझौता हो चुका है। - तीन बड़े रक्षा समझौते
खबरों के अनुसार इस यात्रा के दौरान कम से कम तीन बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।
राजनाथ सिंह ने क्या कहा — “दोस्ती का राज”
- उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते समान मूल्यों (common values) पर आधारित हैं — जैसे लोकतंत्र, खुलापन, कानून का शासन, मानवाधिकार आदि। यह सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं है, बल्कि विश्वास और साझेदारी पर टिका है।
- उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में रक्षा उत्पादन एवं औद्योगिक साझेदारी में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। Navbharat Times+1
- यह यात्रा और करार ऑस्ट्रेलिया-भारत की “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Comprehensive Strategic Partnership) के पाँच साल पूरे हो जाने के अवसर पर हो रही है, जिसे और मजबूत करने का अवसर बताया जा रहा है।
मार्ल्स ने कहा था कि चीन दोनों देशों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता है। दोनों मंत्रियों ने कहा कि मुक्त, खुला, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी है।