(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); Hisar ki no 1 news राम-रमी करते हुए

Hisar ki no 1 news राम-रमी करते हुए आदमपुर विधायक चंद्रप्रकाश ने कहा कि राम-रमी जैसे त्योहार समाज में आपसी भाईचारा और समरसता का प्रतीक हैं। हमें इन अवसरों पर गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और सद्भाव की भावना को मजबूत करना चाहिए।
विधायक चंद्रप्रकाश ने आदमपुर, बालसमंद और आर्यनगर में आयोजित जन मिलन समारोहों में लोगों से मुलाकात की और दीपावली, राम-रमी, विश्वकर्मा पूजा व गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गांव भाणा के विश्वकर्मा मंदिर व धर्मशाला और आदमपुर की ऑटो मार्केट में आयोजित विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने विधायक चंद्रप्रकाश को शॉल, पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

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हिसार आदमपुर के गांव भाणा में विधायक चंद्रप्रकाश को सम्मानित करते विश्वकर्मा मंदिर व धर्मशाला स – फोटो : रामकोट में दीपों से जगमगाता गंगासागर तीर्थ व हुई आतिशबाजी।

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हिसार। आदमपुर विधायक चंद्रप्रकाश ने कहा कि राम-रमी जैसे त्योहार समाज में आपसी भाईचारा और समरसता का प्रतीक हैं। हमें इन अवसरों पर गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और सद्भाव की भावना को मजबूत करना चाहिए।
विधायक चंद्रप्रकाश ने आदमपुर, बालसमंद और आर्यनगर में आयोजित जन मिलन समारोहों में लोगों से मुलाकात की और दीपावली, राम-रमी, विश्वकर्मा पूजा व गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गांव भाणा के विश्वकर्मा मंदिर व धर्मशाला और आदमपुर की ऑटो मार्केट में आयोजित विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने विधायक चंद्रप्रकाश को शॉल, पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। Hisar ki no 1 news राHow To Improve My website Ranking On Google In 2026म-रमी करते हुए

रेस्ट हाउस में जन मिलन कार्यक्रम के दौरान विधायक चंद्रप्रकाश ने कहा कि त्योहार समाज को जोड़ने और पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हलके के विकास के लिए सरकार और प्रशासन को धरातल पर काम करना चाहिए, केवल घोषणाओं से विकास संभव नहीं है।

विश्वकर्मा दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को धर्म ग्रंथों में पहले शिल्पकार और श्रेष्ठ वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है। वे सृजनशीलता, तकनीकी कौशल और नवाचार के प्रतीक हैं। चंद्रप्रकाश ने कहा कि सभी को मिलकर 36 बिरादरी में भाईचारा बनाए रखने और नई पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

Hisar News: डिजिटल टेक्नोलॉजी से भैंस पालन में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का होगा समाधान

हिसार। जलवायु परिवर्तन के कारण पशुपालन, विशेषकर भैंस पालन के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए अब डिजिटल टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा। इस दिशा में रणनीति तैयार करने के लिए राष्ट्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी) में 26 अक्तूबर को एक दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप आयोजित की जा रही है।

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वर्कशॉप में देशभर के 40 वैज्ञानिकों के साथ प्रगतिशील पशुपालक भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, बायोसेंसर और सेंसर-आधारित निगरानी प्रणालियों पर विस्तृत चर्चा होगी।

वरिष्ठ वैज्ञानिक और विशेषज्ञ होंगे शामिल
वर्कशॉप में आईसीएआर के निदेशक डॉ. एमएल जाट, डीडीजी एक्सटेंशन डॉ. राजबीर सिंह, डीडीजी एनीमल साइंस डॉ. राघवेंद्र, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह और सीएसआईआर लैब चंडीगढ़ के अधिकारी शामिल होंगे। चूंकि यह आयोजन डिजिटल टेक्नोलॉजी पर केंद्रित है, इसलिए इसमें आईआईटी रोपड़ के वैज्ञानिक और रोबोटिक कंपनी डेलावल के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।
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पशुपालक बताएंगे अपनी चुनौतियां
वर्कशॉप में प्रदेश के पशुपालक भी शामिल होंगे, जो जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न समस्याओं और उनके समाधान पर अपने अनुभव साझा करेंगे। वैज्ञानिकों की ओर से बताया जाएगा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन, प्रजनन और व्यवहार निगरानी में किस तरह किया जा सकता है, ताकि पशुपालन को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।
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भैंस अनुसंधान केंद्र में चल रहा अभिनव प्रोजेक्ट
केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान में इस दिशा में पहले से ही एक साढ़े 14 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में आईआईटी रुड़की और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड सहयोग कर रही हैं। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बायोसेंसर और गतिविधि निगरानी सेंसर विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे भैंसों के स्वास्थ्य, उत्पादन और व्यवहार से जुड़ा डेटा एकत्र कर उसका विश्लेषण किया जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से पशुपालक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए वैज्ञानिक निर्णय लेने में सक्षम होंगे।
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26 अक्तूबर को संस्थान में राष्ट्रीय वर्कशाप आयोजित की जा रही है। इसमें आईसीएआर के निदेशक सहित अन्य वैज्ञानिक व पशुपालक भी शामिल होंगे।
– डॉ. यशपाल, निदेशक, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान। Hisar ki no 1 ngoogel.comews राम-रमी करते हुए